कलेक्टर एवं जिला जल उपयोगिता समिति के अध्यक्ष डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में सोमवार को जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के जलाशयों में उपलब्ध जल की स्थिति, रबी सिंचाई लक्ष्य, पेयजल आरक्षण, लंबित जलकर राजस्व की वसूली तथा आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में समिति के सचिव एवं कार्यपालन यंत्री श्री विपिन पाटीदार ने अवगत कराया कि वर्तमान में जिले की कुल 255 सिंचाई योजनाओं में 57.61 प्रतिशत उपयोगी जल भराव उपलब्ध है, जबकि गत वर्ष यह 100 प्रतिशत था। उपलब्ध जल की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष रबी सीजन में 55 हजार 78 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है, जबकि गत वर्ष रबी सिंचाई का लक्ष्य 70 हजार 561 हेक्टेयर था। बैठक में उपलब्ध जल की मात्रा के दृष्टिगत यह निर्धारित किया गया कि पानी की कमी के कारण रबी फसलों के लिए किसानों को सिंचाई हेतु केवल दो पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कलेक्टर डॉ. भरसट ने कृषि विभाग एवं उद्यानिकी विभाग को किसानों को जल उपलब्धता के अनुरूप फसल चयन के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले के किसानों से भी आह्वान किया कि वर्तमान जल उपलब्धता को देखते हुए कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली एवं सूखा प्रतिरोधी (Drought Resistant) फसलों की किस्मों को प्राथमिकता दें, जिससे पानी की कमी के कारण किसानों को वित्तीय नुकसान का सामना न करना पड़े।
बैठक में माही बांध एवं जिले की लघु सिंचाई योजनाओं से कुल 33.37 एमसीएम पानी पेयजल प्रयोजन के लिए आरक्षित किया गया। साथ ही जल संसाधन विभाग का नगरीय निकायों, मध्यप्रदेश जल निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं औद्योगिक संस्थाओं पर लंबित 268.42 लाख रुपये के राजस्व की वसूली के संबंध में भी समीक्षा की गई तथा आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर डॉ. भरसट ने विद्युत वितरण कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए कि सिंचाई योजनाओं के कमांड क्षेत्र में नए विद्युत कनेक्शन प्रदान करने से पूर्व जल संसाधन विभाग की लिखित अनुमति (एनओसी) अनिवार्य रूप से प्राप्त की जाए। साथ ही पेयजल के लिए आरक्षित जलाशयों से सिंचाई हेतु अनाधिकृत रूप से पंप लगाकर पानी लेने पर नियंत्रण के लिए टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित जलाशयों से इस वर्ष रबी सिंचाई एवं विभिन्न नगरीय क्षेत्रों के लिए पेयजल आरक्षण पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पेटलावद नगर के लिए चोरबोराली तालाब से 0.60 मि.घ.मी. तथा थांदला नगर के लिए शिवसागर तालाब से 0.42 मि.घ.मी. पानी पेयजल प्रयोजन के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया।
कलेक्टर ने बैठक में नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों से पेयजल के लिए आवश्यक जल आरक्षण के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्य नगर पालिका अधिकारी झाबुआ ने अवगत कराया कि नगर पालिका झाबुआ के पास वर्तमान में 2.88 एमसीएम पानी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त अन्य नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों द्वारा भी आगामी अवधि के लिए आवश्यक जल की मांग रखी गई।
कलेक्टर डॉ. भरसट ने विशेष रूप से राणापुर क्षेत्र में जल संकट की स्थिति को देखते हुए उपलब्ध जल एवं आगामी आवश्यकता का समुचित आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मार्च माह तक की कार्ययोजना तैयार की जाए तथा ग्रीष्म ऋतु के लिए पृथक कार्ययोजना बनाकर आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्व से सुनिश्चित की जाएं, ताकि नागरिकों को पेयजल संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े।
बैठक में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व झाबुआ श्री महेश मंडलोई, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व थांदला श्री भास्कर गाचले, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पेटलावद श्रीमती रीतिका पाटीदार, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मेघनगर सुश्री अवनधती प्रधान सहित जल संसाधन विभाग, विद्युत विभाग, कृषि विभाग, मध्यप्रदेश जल निगम तथा नगर पालिका/नगर परिषदों के अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


