भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), भोपाल शाखा कार्यालय (BPBO) द्वारा 29 सितंबर 2026 को होटल पार्क, सतना में “सल्फेट प्रतिरोधी पोर्टलैंड सीमेंट — विशिष्टि (आईएस 12330 का प्रथम पुनरीक्षण)” पर ‘मानक मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सीमेंट उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े लगभग 25 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री मोहम्मद रिजवान, निदेशक एवं प्रमुख, बीआईएस भोपाल शाखा कार्यालय के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने बीआईएस की भूमिका—मानकीकरण, उत्पाद प्रमाणन एवं गुणवत्ता संस्कृति के प्रचार-प्रसार—पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘मानक मंथन’ के उद्देश्य बताते हुए कहा कि किसी भी मानक को अंतिम रूप देने से पूर्व संबंधित हितधारकों से व्यावहारिक एवं तकनीकी सुझाव प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय मानक केवल गुणवत्ता सुनिश्चित करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उद्योग, अनुसंधान संस्थानों एवं समाज के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करते हैं।

इसके पश्चात श्री हरिओम मीणा, वैज्ञानिक ‘सी’/उपनिदेशक, बीआईएस भोपाल शाखा कार्यालय द्वारा ड्राफ्ट मानक के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। प्रतिभागियों को मानक के उद्देश्य, क्षेत्र एवं प्रमुख आवश्यकताओं, एवं नए संस्करण में किए गए प्रमुख बदलाव से अवगत कराया गया तथा गुणवत्ता एवं अनुपालन संबंधी पहलुओं पर चर्चा की गई। तकनीकी चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने मानक से संबंधित व्यावहारिक विषयों पर अपने सुझाव एवं टिप्पणियाँ साझा कीं। चर्चा में सैंपलिंग पद्धति, परीक्षण प्रक्रिया, प्रयोगशाला आवश्यकताएँ, स्वीकार्यता मानदंड, नमूना प्रबंधन, दस्तावेजीकरण एवं बीआईएस प्रमाणन आवश्यकताओं जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रस्तावित मानक प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत एवं अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए एक प्रभावी मार्गदर्शिका बने तथा इसमें क्षेत्रीय आवश्यकताओं एवं उभरती तकनीकी प्रगति का समुचित समावेश हो।

‘मानक मंथन’ कार्यक्रम ने उत्पादों एवं सेवाओं की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने हेतु बीआईएस की समावेशी, पारदर्शी एवं परामर्शात्मक मानकीकरण प्रक्रिया की महत्वपूर्ण भूमिका को पुनः रेखांकित किया। बैठक में प्राप्त सुझाव एवं अनुशंसाएँ संबंधित तकनीकी समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत की जाएंगी, ताकि अंतिम भारतीय मानक देशभर के हितधारकों की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को प्रभावी रूप से प्रतिबिंबित कर सके।