मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भवन निर्माण और विकास अनुमति में डिजिटल दस्तावेज तथा GIS जांच को आधार बनाने के निर्देश जारी किए हैं। 30 जुलाई की विभागीय सूचना इन्हें लागू सुधार बताती है। नई व्यवस्था में आवेदन, नक्शे और दूसरे दस्तावेज ऑनलाइन जमा होंगे; हार्ड कॉपी की जरूरत नहीं बताई गई। भूमि स्वामी स्वयं आवेदन करे तो ऑनलाइन शपथ-पत्र और अधिकृत कंसल्टेंट के जरिए आवेदन हो तो स्वामी के हस्ताक्षर वाला शपथ-पत्र अपलोड करना होगा।
हर भूखंड पर एक जैसी NOC नहीं
एयरपोर्ट अथॉरिटी, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और विरासत क्षेत्र की NOC तभी मांगी जाएगी जब ऑनलाइन प्रणाली का GIS सत्यापन भूखंड को प्रभावित या प्रतिबंधित क्षेत्र में दिखाए। सहकारिता, गृह निर्माण सहकारी समितियों, बिजली और नजूल विभाग से मांगी जाने वाली कई NOC की अनिवार्यता भी हटाने की बात है। पेड़ काटने की अनुमति तभी जरूरी होगी जब वास्तव में पेड़ काटना प्रस्तावित हो।
सात और इक्कीस दिन की प्रक्रिया
रक्षा प्रतिष्ठान, गृह निर्माण मंडल या विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों में आवेदक से स्वयं NOC लाने को नहीं कहा जाएगा। जरूरत होने पर सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर मामला संबंधित विभाग को भेजेगा; विभाग को 21 दिन में आपत्ति या अनापत्ति देनी होगी। समय में उत्तर न मिले तो प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। रिलीज पोर्टल का सीधा लिंक, स्थानीय सहायता केंद्र या हर श्रेणी की पूरी सूची नहीं देती। किसी भूखंड पर लागू नियम उसके स्थान, आकार और उपयोग के अनुसार जांचने होंगे।
पाठक को अब क्या करना है
मध्यप्रदेश वाले उसी दिन अपने दफ्तर, पोर्टल या काउंटर की पर्ची मिलाएँ। तारीख स्रोत बॉक्स में लिखी है। व्हाट्सऐप पर जो लिंक घूमे, उसे आगे बढ़ाने से पहले मूल पन्ना खोलो — वो लिंक भी यहीं स्रोत में है। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता। पूरी बात इसी पन्ने पर है।
आश्रय इस खबर को ऐसे क्यों लिख रहा है
आश्रय की पहचान विषय से आती है, विज्ञप्ति की नकल से नहीं। विज्ञप्ति ने जो संख्या दी, वही रहेगी। जो नहीं लिखा — हर सिर का हिसाब, हर गली का पता, हर शिविर की घड़ी — हम अनुमान से नहीं भरते। न सरकार का पोर्टल बनना है, न निंदा लिखनी है। बीच में खड़े होकर समझाना है।
गहराई: जगह से समझिए
पहले छत, फिर भाषण। सुर्खी यह है: मध्यप्रदेश में भवन अनुमति के लिए डिजिटल नक्शे और GIS से तय होंगी कई NOC आश्रय इसे मध्य प्रदेश से पढ़ता है। सार यही रहा: नई विभागीय व्यवस्था में आवेदन और नक्शे ऑनलाइन होंगे। एयरपोर्ट, स्मारक और विरासत क्षेत्र की NOC केवल GIS में प्रभावित भूखंड मिलने पर मांगी जाएगी। विषय नक्शे की मंजूरी / मध्यप्रदेश है। इससे आगे की गहराई उसी तथ्य को खोलती है — नया दावा नहीं।
जगह, समय, काम
खबर की पहली पहचान जगह है। मध्य प्रदेश। अगर आपके जिले का नाम इसमें है, तो पन्ना आपके काम का है। अगर नहीं, तो भी प्रक्रिया वही हो सकती है — कॉलेज, पोर्टल, घर, शेड या ड्रिल चौकी पर। तारीख लेख के ऊपर और स्रोत बॉक्स में दो जगह लिखी है। आश्रय तारीख नहीं घुमाता।
मूल सूचना का शीर्षक स्रोत में यों है: भवन निर्माण अनुमतियों की प्रक्रिया हुई सरल, अनावश्यक एन.ओ.सी. की बाध्यता समाप्त। हमने उसे खींचा, अपनी ज़बान में समझाया, लिंक नीचे रखा। सरकारी साइट खबर का क्लिक नहीं है।
तीन बातें, खोलकर
1. आवेदन, नक्शे और दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां स्वीकार करने तथा हार्ड कॉपी न मांगने के निर्देश हैं। आश्रय इसे दोहराता है ताकि पाठक को रटने की ज़रूरत न पड़े। मतलब साफ़ है: यह बिंदु विज्ञप्ति का है, हमारे अनुमान का नहीं। मध्य प्रदेश में इसका असर आपको अपने काउंटर पर जाँचना होगा।
साफ़ भाषा में: आवेदन, नक्शे और दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां स्वीकार करने तथा हार्ड कॉपी न मांगने के निर्देश हैं। जगह मध्य प्रदेश है। आश्रय इसे मंच की तस्वीर से नहीं, काम की जगह से पढ़ता है। तारीख स्रोत बॉक्स में है। अगर आपके घर, शेड, स्कूल या अड्डे पर इसका असर है, तो उसी दिन पर्ची मिलाइए। जो नहीं लिखा गया — हर लाभार्थी का नाम, हर शिविर की घड़ी — उसे हम नहीं गढ़ते। न सरकार का पोर्टल बनना है, न निंदा लिखनी है।
2. AAI, NMA और विरासत क्षेत्र की NOC केवल GIS सत्यापन में प्रभावित या प्रतिबंधित भूखंड पर जरूरी बताई गई। आश्रय इसे दोहराता है ताकि पाठक को रटने की ज़रूरत न पड़े। मतलब साफ़ है: यह बिंदु विज्ञप्ति का है, हमारे अनुमान का नहीं। मध्य प्रदेश में इसका असर आपको अपने काउंटर पर जाँचना होगा।
मध्य प्रदेश वाले ठहरिए। वाक्य दोहराते हैं: AAI, NMA और विरासत क्षेत्र की NOC केवल GIS सत्यापन में प्रभावित या प्रतिबंधित भूखंड पर जरूरी बताई गई। इसके बाद की कथा आप अपनी गली में पूरी करते हैं — बैंक, कॉलेज, वर्कशॉप, घर या दमकल चौकी पर। आश्रय केवल उतना लिखता है जितना स्रोत ने दिया। बाकी सवाल पूछिए अपने दफ्तर से। पूरी बात इसी पन्ने पर है; बाहर के सरकारी क्लिक खबर नहीं हैं।
3. कुछ विभागीय NOC में सक्षम प्राधिकारी सात दिन में मामला भेजेगा और संबंधित विभाग को 21 दिन में उत्तर देना होगा। आश्रय इसे दोहराता है ताकि पाठक को रटने की ज़रूरत न पड़े। मतलब साफ़ है: यह बिंदु विज्ञप्ति का है, हमारे अनुमान का नहीं। मध्य प्रदेश में इसका असर आपको अपने काउंटर पर जाँचना होगा।
पहले छत, फिर भाषण। मध्य प्रदेश से यह पंक्ति खुलती है: कुछ विभागीय NOC में सक्षम प्राधिकारी सात दिन में मामला भेजेगा और संबंधित विभाग को 21 दिन में उत्तर देना होगा। आश्रय इसमें नई संख्या नहीं जोड़ता। जो आँकड़ा पहले पन्ने पर है, वही रहेगा। जो गली, घंटा या सिर का हिसाब स्रोत ने नहीं लिखा, हम अनुमान से नहीं भरते। पाठक को वही करना है जो स्रोत ने बताया — पोर्टल, दफ्तर या काउंटर। व्हाट्सऐप वाला लिंक आगे बढ़ाने से पहले इसी पन्ने का स्रोत बॉक्स खोलिए। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता।
पहले छत, फिर भाषण। मध्य प्रदेश से यह पंक्ति खुलती है: मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भवन निर्माण और विकास अनुमति में डिजिटल दस्तावेज तथा GIS जांच को आध। आश्रय इसमें नई संख्या नहीं जोड़ता। जो आँकड़ा पहले पन्ने पर है, वही रहेगा। जो गली, घंटा या सिर का हिसाब स्रोत ने नहीं लिखा, हम अनुमान से नहीं भरते। पाठक को वही करना है जो स्रोत ने बताया — पोर्टल, दफ्तर या काउंटर। व्हाट्सऐप वाला लिंक आगे बढ़ाने से पहले इसी पन्ने का स्रोत बॉक्स खोलिए। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता।
मध्य प्रदेश वाले ठहरिए। वाक्य दोहराते हैं: एयरपोर्ट अथॉरिटी, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और विरासत क्षेत्र की NOC तभी मांगी जाएगी जब ऑनलाइन प्रणाली का GIS। इसके बाद की कथा आप अपनी गली में पूरी करते हैं — बैंक, कॉलेज, वर्कशॉप, घर या दमकल चौकी पर। आश्रय केवल उतना लिखता है जितना स्रोत ने दिया। बाकी सवाल पूछिए अपने दफ्तर से। पूरी बात इसी पन्ने पर है; बाहर के सरकारी क्लिक खबर नहीं हैं।
साफ़ भाषा में: रक्षा प्रतिष्ठान, गृह निर्माण मंडल या विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों में आवेदक से स्वयं NOC लाने को नहीं कहा। जगह मध्य प्रदेश है। आश्रय इसे मंच की तस्वीर से नहीं, काम की जगह से पढ़ता है। तारीख स्रोत बॉक्स में है। अगर आपके घर, शेड, स्कूल या अड्डे पर इसका असर है, तो उसी दिन पर्ची मिलाइए। जो नहीं लिखा गया — हर लाभार्थी का नाम, हर शिविर की घड़ी — उसे हम नहीं गढ़ते। न सरकार का पोर्टल बनना है, न निंदा लिखनी है।
पहले छत, फिर भाषण। मध्य प्रदेश से यह पंक्ति खुलती है: मध्यप्रदेश वाले उसी दिन अपने दफ्तर, पोर्टल या काउंटर की पर्ची मिलाएँ। तारीख स्रोत बॉक्स में लिखी है। व्हाट्सऐप। आश्रय इसमें नई संख्या नहीं जोड़ता। जो आँकड़ा पहले पन्ने पर है, वही रहेगा। जो गली, घंटा या सिर का हिसाब स्रोत ने नहीं लिखा, हम अनुमान से नहीं भरते। पाठक को वही करना है जो स्रोत ने बताया — पोर्टल, दफ्तर या काउंटर। व्हाट्सऐप वाला लिंक आगे बढ़ाने से पहले इसी पन्ने का स्रोत बॉक्स खोलिए। कार्ड सरकार की साइट पर नहीं ले जाता।
पाठक अभी क्या करे
एक: सुर्खी और तारीख अपने फ़ोन में सहेजिए। दो: स्रोत बॉक्स का लिंक खोलकर मूल पन्ना देखिए — शेयर करने से पहले। तीन: मध्य प्रदेश के दफ्तर, पोर्टल या काउंटर पर अपनी पर्ची मिलाइए। चार: जो संख्या इस पन्ने पर नहीं है, उसे किसी ग्रुप से मत उठाइए। पाँच: कार्ड आपको सरकार की साइट पर नहीं भेजता; पूरी बात यहीं है।
घर बैठे करना हो तो आधिकारिक पोर्टल और बैंक या संस्था का अपना पन्ना खोलिए। व्हाट्सऐप वाला greyscale पोस्टर काफी नहीं। आश्रय पोस्टर की जगह रिपोर्ट लिखता है।
जो लिखा नहीं गया
हर सिर का हिसाब, हर गली का पता, हर शिविर की घड़ी — अगर स्रोत ने नहीं दिया, आश्रय नहीं गढ़ता। फोटो फ़ाइल हो सकती है; कैप्शन ईमानदार रहेगा। न सरकार का पोर्टल बनना है, न सरकार की निंदा। बीच में खड़े होकर समझाना है।
आश्रय इस खबर को ऐसे क्यों लिख रहा है
आश्रय घर की खबर है। चाभी घूमी या नहीं, यही पूछते हैं। पहचान विषय और जगह से आती है। संख्या वही रहेगी जो स्रोत ने दी। अंदाज़ बोलचाल का रहेगा — अधूरे टुकड़े नहीं, पूरे वाक्य। मध्य प्रदेश से शुरू करो, मंच की ताली से नहीं।
मुख्य बातें
- आवेदन, नक्शे और दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां स्वीकार करने तथा हार्ड कॉपी न मांगने के निर्देश हैं।
- AAI, NMA और विरासत क्षेत्र की NOC केवल GIS सत्यापन में प्रभावित या प्रतिबंधित भूखंड पर जरूरी बताई गई।
- कुछ विभागीय NOC में सक्षम प्राधिकारी सात दिन में मामला भेजेगा और संबंधित विभाग को 21 दिन में उत्तर देना होगा।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।



